: मैं हूं अबला कब बन जाऊं सबला - जयश्री अत्रे
Tue, Mar 7, 2023
मैं हूं अबला कब बन जाऊं सबला
ये कोई नही जानता, जब अपने पर आ जाऊं तो तूफानों से खेलूं
हर मुश्किल को पार कर जाऊं
कभी देवी बनूं ,कभी कभी मां बनूं
कभी बहन बनूं तो कभी पत्नी बनूं कभी दादी बनूं कभी नानी बनूं अपनी ममता की छांव में सबको रखूं कभी सबको जीवन की कठिनाइयों से उबारूं
हर रूप में अपने को ढालूं
कभी पापा की बेटी बनूं
कभी किसी की प्रेयसी बनूं
कभी नन्हे मुन्ने बच्चों की मां बनूं कभी शिव की अर्धांगिनी बनूं
कभी राम की सीता बनूं
कभी कान्हा की राधा बनूं
कभी उनकी मीरा बनकर उन्हे पूजूं
कभी शिव की जटा से निकलूं कभी विष्णु की लक्ष्मी बनूं
कभी दुष्टों का नाश करूं
कभी खुद में खुद को ढूंढू
कभी सब्र करती कभी खुद से ही लड़ती नारी बनकर नारायणी बनती
सबके दिलों में अपनी जगह बनाती
अपने प्रेम एवम स्नेह से सबको अपनी तरफ खींचती
कभी ठान ले तो वो कर जाए जो कोई नही कर पर
ऐसी हूं मैं नारी हूं कभी अबला भी हूं और कभी सबला
जयश्री अत्रे खंडवा
: मैं अब भी हूं तुम्हारी, तुम महसूस तो करो - संजय परसाई 'सरल'
Tue, Mar 7, 2023
किताबों की तह में रखे
पुराने ख़त
बहुत कुछ याद दिलाते
अलमारी के पट खुलते ही
खुल जाते यादों के पिटारे
हिलोरे लेने लगती
यादों की लताएँ
ख़तों के बीच रखे
सूखे गुलाब
बरबस बयां कर देते
अपनी दास्तां
होंठ खुले बिना
सब कह जाते
चूर चूर होती
सूख चुकी पत्तियां
यादों की ताज़गी का
कराती अहसास
लगता/ जैसे
ख़त रखी किताब की तरह
अभी भी हाथों में है
वो गुलाब सी महकती
ज़ुल्फों वाला
चाँद सा चमकता चेहरा
और/चेहरे पर
गुलों के मकरंद सी
सजी बिंदियाँ
मानों कह रही हो
मैं अब भी हूं तुम्हारी
तुम महसूस तो करो।
संजय परसाई'सरल' रतलाम(मप्र)
: नारी महिमा अपरंपार, नारी से हैं सम्पूर्ण संसार - अनिल गुप्ता ग्वालियरी
Tue, Mar 7, 2023
नारी शक्ति-नारी महिमा
तो है अपरंपार
नारी माता-बहन-पत्नि-बेटी
पुष्पित-सुरभित प्यार
नारी से संसार
प्रथम गुरू, पाठशाला है
प्रेम नदी औ' झरना
सीखा है हमने उससे ही
हंसना-बोलना-चलना
जननी नहीं होती तो हम
कैसे लेते आकार?
माँ सरस्वति-दुर्गा-लक्ष्मी
और है काली माई
ज्ञान-बल-धन देने वाली
तरुवर-सी परछाई
प्रेमानंद पूर्ण जीवन सुख
तन-मन का आधार
सीता-राम औ' राधे-श्याम
हम भजते रहते हैं
राम, श्याम से पहले
सीता, राधे क्यों कहते हैं ?
नारी ही करती है सुखमय
जीवन को साकार
'अनिल' प्रभु की सर्वश्रेष्ठ कृति का
जो ना करे सम्मान
जानवर-सम है वो प्राणी
नहीं है वो इंसान
नारी तो है प्रभु उपहार
कर नारी सत्कार
-अनिल गुप्ता ग्वालियरी
(गीतकार-लेखक, अभिनेता)