: मां की ममता का कोई किनारा नहीं - प्रीति बर्वे बड़ोले
Wed, May 3, 2023
मां की ममता
वह सागर है
जिसका कोई किनारा नहीं,
ममता की
प्रतिमा से सुंदर ,
कोई और
नजारा नहीं,
जो सुकुन छिपा है
उसके आंचल में ,
उससे बढ़कर ,
कोई सहारा नहीं,
कितनी गहराई है,
फ़िक्र में उसकी,
उस क्षितिज के आगे ,
कोई तारा नही,
कितनी करूणा है
हृदय में उसके ,
नयनों से निहारा
जाता नहीं।
जिस तरह पुकारते हैं
मां को,
किसी और को
पुकारा जाता नहीं,
बचा लेती है ,
दुनिया की बुरी
नजरों से,
उतार कर
क्षण भर में नजर,
न कोई वैद्य,
ना चिकित्सक,
उसके आगे
कोई विकल्प नहीं।
आरंभ जिससे,
सारे जगत का संज्ञान,
करते बारंबार
देवता जिन्हें प्रणाम,
लालायित जिसके
स्नेह को स्वयं
करूणा निधान,
नतमस्तक जिसके
आगे इस रचना
को रचने वाले
रचना कार,
उस मां के लिए मेरे शब्द कोष में शब्द नहीं।
प्रीति बर्वे बडोले - इंदौर
: काश: मेरी भी एक बेटी होती - अनिता गौतम
Wed, May 3, 2023
हृदय की न जाने ये कैसी विडंबना है, प्रत्येक क्षण सत्य होते हुए भी न जाने लगता क्यों सपना है? फिर भी दिल के किसी कोने से यह आवाज है आती, कि काश:! मेरी भी एक बेटी होती, जिसमें में अपना बचपन स्मरण कर पाती जैसे मैं अपने माता-पिता की दुलारी हूं शायद वह भी मेरी प्यारी होती, परछाई में देखती अपनी छवि को सजाती और संवारती जैसे कि आसमान में नन्ही परी होती, यूँ तो दिल को समझाने को दुनिया की हर बेटी मेरी बेटी है पर सपने कहां अपने होते हैं आंख खुलते ही सामने से ओझल हो जाते हैं, जो सुख तो क्षण भर देते हैं पर दुख: असीमित दे जाते हैं, पर ना जाने क्यों समाज की यह असहनीय दुर्दशा देखकर शरीर मृत शिथल हो जाता है, जब आँखों के समक्ष एक बेटी का अस्तित्व ही माँ की कोख में मिटा दिया जाता है, तब सहसा हृदय में एक सवाल विचरण कर जाता है कि काश: तू अगर कहीं भगवान है तो क्यों तमाशबीन बने यह सब देखता है, क्यों नहीं तू अपनी इच्छाधारी शक्ति का परिचय देता, जिससे पनपते हैं असुर और देवता, क्यों कुछ हैवान इस धरा पर उपज जाते हैं जो एक ही क्षण में किसी के घर की लाज का अस्तित्व ही मिटा जाते हैं, चंद क्षणो की हवस मैं क्यों वह यह सब भूल जाते हैं, कि हमने जिस का हनन किया वह भी किसी की बहन और बेटी है, हम बात करते हैं वंश रुपी उस इमारत की जिसकी नीव में लगी वह पहली ईंट तो बेटी है, बेटी शब्द से क्यों आज ये समाज अनभिज्ञ व अनजान है, क्योंकि बेटी ने ही जन्मे ब्रह्मा, विष्णु, महेश और रुद्र जैसे भगवान है।
अंत में मैं यह सब अनदेखा कर देती हूँ कि काश: मेरी भी एक बेटी होती......
अनिता गौतम
आगरा, उत्तरप्रदेश
: मेरी प्यारी मां - अभिधा विरमाल
Wed, May 3, 2023
सीधी - साधी भोली - भाली,
मां तू कितनी अच्छी है,
चाहे कोई कुछ भी कह ले -
जग में एक तू ही सच्ची है ।
घुटनों से रेंगते- रेंगते,
न जाने कब खड़ी हुई माँ,
तेरी ममता की छांव में -
न जाने कब बड़ी हुई माँ।
रात भर जागते रहना,
तबीयत बिगड़ जाने पर,
हर पल मेरा ख्याल रखना
सोना न एक भी पहर।
खाना पहले हमें खिलाती,
बाद में तुम खाती हो मां,
हमारी खुशी में तुम खुश हो-
अपना दर्द भूल जाती मां।
संस्कार हमें तुम बतलाती,
अच्छे बुरे का भेद समझाती,
हमारी गलतियों को सुधारती-
सही ग़लत का फर्क बताती ।
तुझमें ही भगवान है बसता ,
हमको तुझसे जीवन मिलता,
तेरे कदमों में स्वर्ग हे रहता -
तुझसे ही ये संसार हे चलता।
आज भी मुझको दर्द होता तो
दर्द तुझको भी होता है ,
मां बेटी का रिश्ता दुनिया में -
कितना सुंदर होता है।
दिल करता है सब छोड़कर
सीने से तेरे लग जाऊं मैं
सारी दुनिया को भूलकर
आंचल में तेरे छुप जाऊं मैं।
कितने खुशनसीब है हम ,
मां तुम हमारे पास हो ,
इस संसार का सबसे अच्छा -
कितना सुंदर एहसास हो ।
ईश्वर ने तुझमें अपना ,
सुंदर रूप रचाया है ,
इस संसार में सबसे प्यारा -
मां, उसने तुझे बनाया है।
अभिधा विरमाल - इन्दौर