: याद है हमें मां की हिदायतनामा - सरिता कुमार
Fri, May 5, 2023
खौंफ रहा उनकी निग़ाहों का हम सभी को
मगर उनकी परवाह भी याद है हमें
इम्तिहान के दिनों में बेवजह उनका जगना
हमें जगाने के लिए चाय और कॉफी बनाना
उन सर्द भरी रातों में रजाई से निकल कर चूल्हा जलाना
बैठकर हमारे पास हमें पढ़ाना
फिर अहले सुबह तैयार होकर दैनिक दिनचर्या में जुट जाना
तीज त्योहारों पर बनाना ढ़ेरों पकवान बनाना
रंग बिरंगे कपड़े सिलना
इस्त्री करके हमारे कपड़ों पर हमें सुव्यवस्थित दिखाना
याद है हमें उनकी सभी बातें
सुख दुःख साझा करके सहेली बन जाना
हाले दिल हमारा टटोल कर बाखबर रहना
खाते पीते खेलते सोते हुए नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाना
सुनाना हमेशा अर्थपूर्ण प्रेरणादायक कहानियां
बेतरतीब सो जाने पर इधर उधर कहीं कायदे से सुलाकर चादर ओढ़ाना
घोंटकर जन्मघुट्टी में ही संस्कार का पिलाना
तौर तरीके , हया अदब सब धीरे-धीरे समझाना
शिक्षा, दीक्षा, ज्ञान देकर हम सबको परिपूर्ण बनाना
याद है हमें हमारी मां की हिदायतनामा।
लिटरेरी जनरल सरिता कुमार - फरीदाबाद
: काश: मेरी भी एक बेटी होती - अनिता गौतम
Wed, May 3, 2023
हृदय की न जाने ये कैसी विडंबना है, प्रत्येक क्षण सत्य होते हुए भी न जाने लगता क्यों सपना है? फिर भी दिल के किसी कोने से यह आवाज है आती, कि काश:! मेरी भी एक बेटी होती, जिसमें में अपना बचपन स्मरण कर पाती जैसे मैं अपने माता-पिता की दुलारी हूं शायद वह भी मेरी प्यारी होती, परछाई में देखती अपनी छवि को सजाती और संवारती जैसे कि आसमान में नन्ही परी होती, यूँ तो दिल को समझाने को दुनिया की हर बेटी मेरी बेटी है पर सपने कहां अपने होते हैं आंख खुलते ही सामने से ओझल हो जाते हैं, जो सुख तो क्षण भर देते हैं पर दुख: असीमित दे जाते हैं, पर ना जाने क्यों समाज की यह असहनीय दुर्दशा देखकर शरीर मृत शिथल हो जाता है, जब आँखों के समक्ष एक बेटी का अस्तित्व ही माँ की कोख में मिटा दिया जाता है, तब सहसा हृदय में एक सवाल विचरण कर जाता है कि काश: तू अगर कहीं भगवान है तो क्यों तमाशबीन बने यह सब देखता है, क्यों नहीं तू अपनी इच्छाधारी शक्ति का परिचय देता, जिससे पनपते हैं असुर और देवता, क्यों कुछ हैवान इस धरा पर उपज जाते हैं जो एक ही क्षण में किसी के घर की लाज का अस्तित्व ही मिटा जाते हैं, चंद क्षणो की हवस मैं क्यों वह यह सब भूल जाते हैं, कि हमने जिस का हनन किया वह भी किसी की बहन और बेटी है, हम बात करते हैं वंश रुपी उस इमारत की जिसकी नीव में लगी वह पहली ईंट तो बेटी है, बेटी शब्द से क्यों आज ये समाज अनभिज्ञ व अनजान है, क्योंकि बेटी ने ही जन्मे ब्रह्मा, विष्णु, महेश और रुद्र जैसे भगवान है।
अंत में मैं यह सब अनदेखा कर देती हूँ कि काश: मेरी भी एक बेटी होती......
अनिता गौतम
आगरा, उत्तरप्रदेश
: इंदौर की सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल' की कृति को मिला मां सरस्वती ज्ञानपीठ पुरस्कार
Fri, Apr 28, 2023
इंदौर संवाददाता। विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष पर मनोहर ग्रुप ऑफ कंपनीज एंड इंस्टीट्यूशंस, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के द्वारा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, साकेत, मेरठ में राष्ट्रीय स्तर के माँ सरस्वती ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2022 का सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन व अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन संस्थापक एवं आयोजक श्री मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव जी, राज्य उपाध्यक्ष आ. साजिद अली सतरंगी तथा जिलाध्यक्ष आ. सीमा गर्ग मंजरी जी द्वारा भव्य कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया।इसी अवसर पर इंदौर की लेखिका की कृति 'पर्वोत्कर्ष' को 2022 की श्रेष्ठ कृति के रूप में चयनित कर 'माँ सरस्वती ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2022' देकर सम्मानित किया गया।
लेखिका सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल' की यह प्रथम कृति है जो मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी से चयनित व वर्ल्डस् ग्रेटेस्ट रिकाॅर्ड में तो दर्ज है ही और अब मेरठ उ.प्र. से राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त कर चुकी है। इस राष्ट्रीय पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पूरे देश से लगभग 445 पुस्तक प्रविष्टियों के साथ प्रारंभ की गई थी और जो तीन माह लगातार पारदर्शी रूप से चली तत्पश्चात परिणाम घोषित किए गए, इस तरह लम्बी प्रक्रिया के बाद इंदौर म.प्र. की लेखिका सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल' को "माँ सरस्वती ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2022" मिलना इंदौर म.प्र. के लिए गौरव की बात है। सपना को पुरस्कार स्वरूप प्रतीक चिन्ह, प्रशस्तिपत्र और नगद राशि संग गिफ्ट कूपन्स प्राप्त हुए है।
इस कार्यक्रम के साक्षी देशभर के कई ख्याति प्राप्त साहित्यकार व पत्रकार रहे। जिनमें वरिष्ठ पत्रकार लियाकत मंसूर, पायल लक्ष्मी सोनी, आशुतोष सुधाकर, ऊषा रानी भिड़वारिया जी, माला सिंह, आ. सरबजीत सिंह, डॉ. किरण सिंह, रामकरण साहू, आ. दिनकर स्वरूप, आ. देव कुमार, डॉ. शुभम त्यागी, स्वामी चरण सिंह, रामगोपाल भारतीय, डॉ. राजीव गुप्ता, अशोक गोयल, प्रभात रॉय, कुमार आदेश शिखर, मंगल सिंह, रेखा गिरीश, नीलम मिश्रा, सुषमा सवेरा, कवि कपिल आदि देश भर के नामचीन कविगण शामिल रहे। सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल' की इस उपलब्धि पर उनके पति श्री चंद्रप्रकाश साहू, भाई सचिन सिंह राणा सहित अनेक सम्मानीय साहित्यकारों ने शुभकामनाएं प्रेषित की है।