: दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कला माँ की लोरियां हैं - मन कमलहन्स गुप्ता
Wed, May 3, 2023
माँ और परमात्मा दोनों खूबसूरत सम्बन्ध एक दूजे के पर्याय एक दूजे के पूरक, परमात्मा में माँ छिपी है और माँ ही परमात्मा का स्वरूप है ये जगजाहिर है, क्या मिसाल दे मन माँ की, क्या तुलना करें माँ की किसी और से, इस धरा पर सर्वप्रथम मिलन और पूजन माँ का होता है, शायद ईश्वर या परमात्मा का भी नहीं अतः पहले माँ फिर परमात्मा फिर ये धरा यानी धरती माँ, परमात्मा भी धरती पर कलाएं लेकर आया पर दुनियां में सर्वश्रेष्ठ कला अगर कुछ है तो वो माँ की लोरियां।
एक बच्चा जिस क्षण पैदा होता है माँ भी उसी समय पैदा होती है उससे पहले तो वो एक औरत मात्र होती है और माँ की महानता देखो उन 9 महीनों में माँ स्वयं को मृत्यु के सम्मुख खड़ा कर देती है जो शायद कोई और ना कर सके, एक बच्चा माँ के पास जो बढ़ता है जिस गति से उसका विकास होता है उसका कारण एकमात्र माँ होती है, माँ का ध्यान होता है माँ की केयर होती है माँ चाहे दूर हो पास हो चाहे दूसरे कमरे में हो हजारो काम मे उलझी हो या सेकड़ो मील दूर ही क्यों ना हो माँ का ध्यान माँ का अंतर्मन अपने बच्चे में ही होगा क्योकि माँ एक बिना शर्त का प्यार है और ऐसा ख्याल सिर्फ माँ रख सकती है और माँ की तरह कोई ख्याल रख पाए ये सिर्फ ख्याल ही हो सकता है।
भगवान हर जगह नहीं जा सकता शायद इसीलिए उसने अपने प्रतिरूप में माँ बनाई, परमात्मा ने दो आंखे बनाई देखने के लिए पर खुद नजर आता है बन्द आंख से, वो परमात्मा भी तरसा माँ की ममता को इसलिए वो भी जन्मा माँ की कोख से, दुनियां में जब जब रिश्तों की बात होगी मां से बढ़कर कुछ ना होगा कोई भी अगर ये दुनियां छोड़ जाता है तो हर रिश्ता कुछ समय याद रखता है बस माँ ही होती है जो जब तक जियेगी अपने बच्चे को पल पल याद करेगी, माँ को लिखा जा सके ये इस मन के बस की बात नहीं इसलिए सर्वश्रेष्ठ सर्वाधिक सर्वप्रथम पहली पायदान पर माँ और सिर्फ माँ ही है।
माँ के लिए कोई मन क्या लिखेगा जबकि माँ ने स्वयं हर मन को लिखा हैं।
मन कमलहन्स गुप्ता (माण्डलियां), इंदौर
: मां की ममता का कोई किनारा नहीं - प्रीति बर्वे बड़ोले
Wed, May 3, 2023
मां की ममता
वह सागर है
जिसका कोई किनारा नहीं,
ममता की
प्रतिमा से सुंदर ,
कोई और
नजारा नहीं,
जो सुकुन छिपा है
उसके आंचल में ,
उससे बढ़कर ,
कोई सहारा नहीं,
कितनी गहराई है,
फ़िक्र में उसकी,
उस क्षितिज के आगे ,
कोई तारा नही,
कितनी करूणा है
हृदय में उसके ,
नयनों से निहारा
जाता नहीं।
जिस तरह पुकारते हैं
मां को,
किसी और को
पुकारा जाता नहीं,
बचा लेती है ,
दुनिया की बुरी
नजरों से,
उतार कर
क्षण भर में नजर,
न कोई वैद्य,
ना चिकित्सक,
उसके आगे
कोई विकल्प नहीं।
आरंभ जिससे,
सारे जगत का संज्ञान,
करते बारंबार
देवता जिन्हें प्रणाम,
लालायित जिसके
स्नेह को स्वयं
करूणा निधान,
नतमस्तक जिसके
आगे इस रचना
को रचने वाले
रचना कार,
उस मां के लिए मेरे शब्द कोष में शब्द नहीं।
प्रीति बर्वे बडोले - इंदौर
: माँ मुझको भी तुम जादू की छड़ी ला दो न… - अनिता शर्मा
Wed, May 3, 2023
पानी सा निर्मल प्यार तेरा
गूँथ आटा उससे बेल बेल बढ़ाती हो
थपकियों दे दे कर आँचल सा फैलाती हो
नरम गरम सी समझाईश तेरी
सेक सेक कर घी सा स्नेह लगाती हो
धीमी-धीमी आँच पर हिम्मत को पकाती हो
अपने अहम को जलाकर स्वाभिमान बढ़ाती हो
बातों बातों में अपना हूनर मुझको भी सिखाती हो
दाल में माखन सा प्यार पिघलाकर रोज तुम खिलाती हो
कैसे कर लेती हो ये सब
इतना दिल बड़ा कहाँ से लाती हो
सबके नखरे सहकर भी हमेशा ही मुस्काती हो
अपने हिस्से की खुशियाँ माँ मुझपर ही लुटाती हो
सिकुड़ता जब मेरा मनोबल
तुम ममता सी चादर ओढ़ाती हो
पास रहूँ या दूर तुझसे
तुम सारा हाल समझ जाती हो
माँ तुम ये प्यार की गागर भर के कहाँ से लाती हो
भर भर कर इतना प्यार कैसे सब पे लुटाती हो
माँ मुझको भी तुम जादू की छड़ी ला दो न……
मैं भी तो ये जान सकूँ माँ कैसे तुम ये सब कर पाती हो…..
अनिता दीपक शर्मा - इंदौर