: मैं पूछती हूँ आपसे - डा राजमती पोखरना सुराना भीलवाड़ा, राजस्थान
अपनी पीडा अपनी मौन व्यथाओ का,
अपनी ख़्वाहिशों ऑखों की सह्दयता का,
अपने अस्तित्व का परिचय मैं पूछती हूँ आज।
क्या लिखूं खुद की आजादी के लिये मैं आज,
लिखने को बोला गया मेरे जज़्बातो पर आज,
मेरे जज़्बातो की है कद्र क्या मै पूछती हूँ आज।
जीवन का आनंद खो गया आज ना जाने कहाँ,
जब से ली सुध मैंने मन ना जाने खोया कहाँ,
नीरस सा हुआ मन क्यों मै पूछती हूँ आज।
जीवन की करूण कथाओ का क्रंदन,
कहो तो आज कर दूँ मैं लूटे हुए जीवन को चित्रण
क्यों हुआ हाल जमाने में ऐसा मै पूछती हूँ आज।
वक्त की ऑधियो के साथ मुझे कुचला गया,
उन्मुत परिंदा थी मै मेरे पंखों को काटा गया,
मेरी चेतना को अचेतन क्यूँ किया मै पूछती हूँ आज।
मै तो नारी सभी की जिन्दगी की रोशनी हूँ,
प्रश्न फिर भी यही कि मैं क्यूँ सुनती रहती हूँ,
जिन्दा जिस्म को लाश बनाया क्यूँ मैं पूछती हूँ आज।
खुदा की कैसी रहमत है मुझ पर जानना चाहती हूँ,
चीख ,दर्द, पीड़ा, सहनशीलता, खामोशी के पिंजरे में कैद हूँ,
आख़िर क्यों दुखों का सैलाब मुझमें जमाने से मै पूछती हूँ आज ।
पूछना चाहती हूँ अपने दिल की हर बात आज मैं,
फ़सल मैंने तो अपनेपन की उगाई थी दुनियाँ में,
मेरे हिस्से की खुशियाँ क्यूँ गुमशुदा हुई मैं पूछती हूँ आज ।
अब कितना पूछू जमाने से मै तो पूछते पूछते थक गई ,
मेरी जिंदगी भी एक कहानी किस्सा बन कर रह गई,
क्या मिलेगी मेरे हिस्से का आसमां यही मैं पूछती हूँ आज ।।
डा राजमती पोखरना सुराना भीलवाड़ा, राजस्थान
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