: माँ को जो पुत्र वृद्धाश्रम में रखे... - रामेश्वर शांडिल्य
Mon, May 8, 2023
माँ तो जग में महान है।
माँ तो ममता की खान है।
माँ की श्रद्धा पूजा प्रेम भक्ति से
वैभव लक्ष्मी आती मकान है।
माँ से बढ़कर जग में कोई नहीं
स्नेह प्रेम की मीठी जबान है।
माँ की महिमा वो क्या जाने
जो हिंसक पशु या अज्ञान है।
माँ शिक्षा की प्रथम पाठशाला
जहां मिलता संस्कार ज्ञान है।
माँ खुद भूखी प्यासी रहकर
बच्चो पर लुटती जान है।
माँ को जो पुत्र वृद्धाश्रम में रखे
दुनिया में सबसे बड़ा शैतान है।
रामेश्वर शांडिल्य - ग्राम
मेलनाड़ीह
, बिलासपुर छ ग
: माँ का कोई विकल्प नहीं - नगेंद्र बाला बारैठ
Mon, May 8, 2023
सभ्य समाज का एक मज़बूत स्तंभ स्त्री है ये मेरी व्यक्तिगत विचारधारा है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी, सौम्यता व अनुपम सौंदर्य की प्रतिमा, सहनशीलता व मधुर स्वभाव युक्त एक नारी ही हो सकती है, यूं तो ईश्वर ने उसे अनेक रूप दिए है लेकिन जो उसका एक निर्मल सा रूप है वो है माँ का, कहने को तो एक छोटा सा शब्द होगा लेकिन इस शब्द में पूरा ब्रह्मांड समाया है। जब जब एक बालक माँ पुकारता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता चला जाता है, उसमें एक ऊर्जा का संचार होता है और एक मानसिक सुकून मिलता है। जब भी मन उदास होता है, कभी मन नहीं लगता, या फिर बीमार होते है तो ना किसी से बात करने का दिल करता है ना ही कुछ और काम करने का मन, ऐसे में हमारे सब परेशानियों का मरहम माँ ही होती है। उसमें वो ओरा होता है जो हमे आंतरिक उपद्रवों से लड़ने की ताकत देता है।
जब जब हार मानकर बैठ जाते है तो माँ ही होती है जो अपनी मीठी वाणी से हम में वो कठिन से कठिन काम करने का ज़ज्बा देती है। इसे ईश्वरीय चमत्कार कहें या कोई वैज्ञानिक कारण लेकिन इस बात का इतिहास भी गवाह है कि माँ की आवाज़ मात्र से गहरी नींद में सोया बालक भी एक बार उठ कर हाँ बोल देता है, दुर्गासप्तशती में लिखा है कि जो अनेक बार पाप कर चुके है, जो रक्षसी स्वभाव युक्त है वो मेरी शरण में आ एक बार "माँ" पुकारते है, मैं उनके सहस्त्र पाप क्षमा कर देती हूं और उनको वो गति प्राप्त होती है जो देवता आदि के लिए है। जब इतने बड़े ग्रंथ में माँ को ये स्थान दिया गया है तो हम मानव क्यों नहीं ये बात समझ पाते है, ना जाने कितनी बार हम उसका दिल दुखाते है, कितनी ग़लतियाँ करते है, उसे छोड़कर अपना एक अलग संसार बसा लेते है, कितनी ही नादानीया कर देते है मगर वो हमे सहज ही माफ़ कर देती है और गले से लगाये रखती है। आज हमारा भी यही कर्तव्य बनता है कि हम भी उसकी मुस्कराहट को सबसे पहले रखे। उसकी इच्छा को तरजी दे। "माँ" प्रकृति का दिया हुआ वो अनुपम आशीर्वाद और स्नेह रूपी उपहार है उसमें सभी दैवीय शक्तियां समाहित है, उसके आशीष मात्र से अन्न धन्न के भंडार भर जाते है, उसकी हंसी से ही अंगना में चांद खिल जाता है और सूरज की रोशनी चहुँ ओर फैल जाती है। उसके मार्गदर्शन व तराशने भर से शिक्षा, उन्नति के मार्ग खुल जाते है। शायद ये बात भी कटु सत्य है कि माँ सा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि एक वही है जो चाहे अमीरी हो गरीबी एक बालक की समस्त मनोकामनाएं वही पूरी करती है। ऐसी अतुल्य निधि का मान, सम्मान, इज्ज़त, पूजा उसके जीते जी ही करनी चाहिए। क्योंकि वो देखे और खुश हो वही काम और हमारी साधना, उपलब्धी तभी सफ़ल है। उसके जाने के बाद अगर संगमरमर की मूर्ति चौराहे पर भी बना दे तो व्यर्थ है और सभी ओर केवल और केवल घनघोर अंधेरा है।
स्वर्ग से उतरी अप्सरा हो तुम,
बहती निर्मल धारा हो तुम,
मैं मुर्ख, अज्ञानी भटक रहा था मुद्दतों से,
मेरी तपस्या को सुराह दिखाने वाली माँ हो तुम।
नगेंद्र बाला बारैठ - दिल्ली
: दलाई लामा एवं इंद्रेश के सानिध्य में 25वां रजत जयंती समारोह कार्यक्रम
Sat, May 6, 2023
हिमाचल : 5 मई 2023 हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज स्थित दलाई लामा मंदिर में भारत तिब्बत सहयोग मंच ने अपना 25 वा स्थापना दिवस एवं रजत जयंती समारोह का आयोजन किया, इस मंच की स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ पूज्यनीय वरिष्ठ प्रचारक श्री राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया एवं पंचम पूज्यनीय प्रचारक श्री सुदर्शन तथा श्री दलाई लामा के सानिध्य में की गई थी, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक माननीय श्री इंद्रेश कर रहे हैं।
स्थापना दिवस के कार्यक्रम में वर्तमान समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय इंद्रेश, राष्ट्रीय महामंत्री माननीय पंकज गोयल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री गजेंद्र चौहान एवं राष्ट्रीय मंत्री श्री प्रमोद गोयल एवं परम पूज्य दलाई लामा एवं मध्य प्रदेश से प्रांत अध्यक्ष सुश्री मोनिका जैन एवं हिमाचल प्रदेश के वर्तमान सांसद श्री किशन कपूर एवं अन्य प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित हुए, इसके साथ ही समस्त तिब्बती हिमाचल प्रदेश निवासी भी एक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित हुए, कार्यक्रम में बुद्धिस्ट मोंक भी उपस्थित हुए, कार्यक्रम के दूसरे चरण में मंच का संचालन कर रही सुश्री प्रीति सागर ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया साथ ही वंदे मातरम गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई, कार्यक्रम में भारत तिब्बत सहयोग मंच के समस्त कार्यकारिणी सदस्यों ने मिलकर दलाई लामा का एक विशाल फूलों की माला पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया।
कार्यक्रम के अगले दौर में माननीय इंद्रेश कुमार ने अपने व्याख्यान में बताया कि हमें हिंसा नहीं अहिंसा परमो मैत्री की स्थापना करना आवश्यक है तथा इस युद्ध के दौर में, मैं बौद्ध की शुरुआत करना चाहता हूं जिससे हम हिंसा नहीं अहिंसा परमो धर्म की स्थापना कर सकें क्योंकि आज के समय हमारे समाज को हमारे देश को रावण और कंस की आवश्यकता नहीं है राम और कृष्ण की आवश्यकता है युद्ध की कामना के बजाय में बौद्ध की कामना करना चाहता हूं जिससे विश्व भर में शांति की स्थापना हो सके साथ ही हम सब विश्व की समस्त शक्तियों से यहां आग्रह करते हैं कि वहां एक साथ होकर तिब्बती लोगों को उनके मौलिक अधिकार, ऑटोनॉमस एवं आजादी दिलाने में सहायता करें साथ ही मैं उस संस्था का भी सहयोग करूंगा जो दलाई लामा के साथ मिलकर वर्षों से उनके मौलिक अधिकार दिलाने में उनकी सहायता कर रही है, आज इस समृद्ध सभा मै यहां प्रस्ताव प्रसारित करना चाहता हूं कि चीन अपना षड्यंत्र बंद कर तिब्बती जनता को उनके मौलिक अधिकार वापस करें जिससे तिब्बती जनता निष्कासित नहीं बल्कि निवासी बन कर तिब्बत का निर्माण करें। इसके साथ ही माननीय इंद्रेश ने आज समस्त तिब्बती एवं भारतीय जनता को नारा दिया जय भारत जय तिब्बत।
व्याख्यान के दूसरे सत्र में परम पूज्य दलाई लामा ने बताया की, जब वह तिब्बत से भारत आए थे तब जवाहरलाल नेहरू जी ने उन्हें यहां रहने के लिए स्वीकृति दी थी, पर में भारत का शुक्रगुजार हूं कि भारत ने मुझे पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की एवं अपने बौद्ध धर्म को मानने एवं उसके विचारों का विस्तार करने का पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की आज मैं समस्त तिब्बती लोगों एवं भारतीय लोगों से आग्रह करूंगा कि आप बौद्ध धर्म में लिखी गई 300 सूत्र और शास्त्र की किताबों का अध्ययन करें एवं ज्यादा से ज्यादा अध्ययन करने से आपकी अध्यात्मिकता शक्ति प्रबल होगी, इसके साथ ही मैंने भारत में कई जगह भ्रमण किया और भारत के कई विद्वानों से मिला और मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि वहां बौद्ध विज्ञान को बराबर महत्व देते हैं इसके साथ ही में भारत तिब्बत सहयोग मंच का भी आभारी हूं शुक्रगुजार हूं कि वहां इतने वर्षों से तिब्बत के सहायता के लिए तिब्बती लोगों की सहायता के लिए रात दिन हमारे साथ है इसके साथ ही में माननीय इंद्रेश माननीय मोहन भागवत का भी शुक्रगुजार हूं। इसके तत्पश्चात भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हरियाणा यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री गजेंद्र चौहान ने भी तिब्बत मंच का अभिनंदन करते हुए आभार प्रकट किया एवं कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आज तिब्बत मंच पूरे देश भर में तिब्बतियों की सहायता करता है एवं उनकी संस्कृति को संजोए रखने का कार्य कर रहा है, कार्यक्रम के तीसरे सत्र में सभी प्रांत के पदाधिकारियों ने मंचासीन अतिथियों का सम्मान किया एवं उन्हें मोमेंटम भेंट किया। इसके तत्पश्चात मध्य भारत प्रांत की अध्यक्ष मोनिका जैन एडवोकेट ने हिमाचल प्रदेश के सांसद श्री किशन कपूर का मोमेंटम भेंट कर सम्मान किया एवं माननीय इंद्रेश कुमार, और परम पूज्य दलाई लामा के वरिष्ठ शिष्य का सम्मान किया। कार्यक्रम का समापन भारत एवं तिब्बत का नेशनल एंथम के साथ किया गया।
जया अग्रवाल, मीडिया प्रभारी
मध्य भारत प्रांत