: ना पर हाँ की विजय का उत्सव होली - मन कमलहन्स
Tue, Mar 7, 2023
होली याने जो चीज हो ली वैसी हो ना सकेगी अलौकिक अद्भुत रंगीन धुन्ध रंगों की ! होली जैसा कोई दूसरा त्यौहार इस वसुंधरा पर ढूंढने से भी ना मिलेगा ! रंग है गुलाल है आनंद है, उत्सव है खो जाने का सब कुछ पाने का मदहोशी का तल्लीनता का मस्ती का नाच गाने का मृदङ्ग बजाने का ,ये नाच का सतरंगी इंद्रधनुषी त्योहार है,हँसी के फव्वारों का उल्लास के ठुमको का महत्योहार है ये अन्य सारे बड़े से बड़े उत्सव भी उदास से हैं इस रसभरे रँगभरे महोत्सव के सामने !होली की तो बात ही निराली है हर पल नृत्य उल्लास खुशियों वाला दूसरा त्यौहार सम्पूर्ण पृथ्वी पर नहीं है ,ये त्योहार सबसे बड़ी विजय है नास्तिकता पर आस्तिकता की यानी आनंद की कोई भी त्योहार गमों से नहीं होता है अपितु गम भुलाने के लिए होता है होली इसका उत्तम प्रतीक है सम्पूर्ण नृत्य उत्सव ना पर हाँ की विजय का उत्सव, सृजन का उत्सव ,महाशक्तिशाली असुर पर मासूम कोमल बालक की आस्था की जीत का उत्सव क्या खूब रंगों भरा उत्सव ! मन का तो ये मानना है कि हम सब सिर्फ़ नाचते गाते प्रभु के द्वार तक जाएंगे जरा गौर से देखो ईश्वर ने कितना रंग सजाया है हर जगह फूलों में ,इंद्रधनुषों में, हरयाली में ,पक्षियों में, तितलियों में हम सब तो बेरंग है इसके सामने ?? सारी सृष्टि में यही होली का सार है, मनाओ इस उत्सव को और रंगीन हो जाओ अपने सारे रंग गीले करके बन जाओ रंगीला मनमस्त मनमित्र
मन कमलहन्स - इंदौर
: तुम भी आओ आज तो पिया, रंग जाओ मेरे रंग में - Dr. सुनीता संजीव दुबे
Tue, Mar 7, 2023
रंगो से भरी फिजाओं ने फिर हौले से मुस्कुराया है
लो फिर छाया फागुन का सुरूर, दिल ने फिर हौले से प्रीत को गुनगुनाया है
रंग उड़े, गुलाल उड़े, उड़ती है मस्ती हवाओं में
मन मिले, आनंद मिले और मिले दुलार जीवन की फिजाओं में
रंगो के इस इंद्रधनुष में और निखरे तेरा मेरा प्यार
कान्हा तो आए बरसाने, खेलन राधा संग होरी
तुम भी आओ आज तो पिया, रंग जाओ मेरे रंग में
उड़े तेरी प्रीत का गुलाल, मेरे भी मन मंदिर में
चंचल चितवन ने मस्त मगन हो प्रिय, दे ये स्नेह आमंत्रण तुम्हे बुलाया है
लो फिर छाया फागुन का सुरूर, दिल ने फिर हौले से प्रीत को गुनगुनाया है।
आज तो साजन हठ है, रंग ही दूंगी
तुमको मैं ऐसे जाने ना दूंगी
यू करना मुझसे जोराजोरी, मल ही दूंगी गुलाल मुख पर तेरे चोरी-चोरी
छूट न सका कान्हा के जीवन से, वो राधा का प्यार मलूंगी
रंग नहीं, बरसो-बरस न उतरे ऐसा खुमार मलूँगी
एक बार तो हाँ कर पिया, जीवन भर तेरा मान रखूंगी
कन्हैया के विश्वास, राधा की प्रीत का ही तो मेरे दिल पर शरमाया है
लो फिर छाया फागुन का सुरूर, दिल ने फिर हौले से प्रीत को गुनगुनाया है।।
Dr. सुनीता संजीव दुबे
: आओ होली की तैयारी करें - प्रीति बर्वे बडोले
Tue, Mar 7, 2023
आओ होली की तैयारी करें
चटकिलें , सुनहरे,छहरे रंगों को इस उत्सव में समाहित करें
आओ होली की तैयारी करें
कुछ अनाम रिश्तों की सिफारिश करें
अनजान पहलुओं की पहचान करें
रूठों को मनाने की साजीश करें
टूटे हुए तारों की नुमाइश करें
बिछड़ गए जो वक्त की मात से
उन रिश्तों की फरमाइश करें
आओ होली की तैयारी करें
यादों में रहते हैं जो हरपल
उन किस्सों में ताजगी भरें
बित गए जिनके बिना कई
दिन, महिने,साल,
संग कुछ पल बिताने की गुंजाइश करें
आओ होली की तैयारी करें
सूख गए वो गूलाब जो
रखें थे किताबों में
एकटक निहार कर उन्हें मन को मुस्कराहट से भरे
खो गई जो राहें सुनेपन से
उन राहों में ठहाकों की गूंज करें
आओ होली की तैयारी करें।
प्रीति बर्वे बडोले - इंदौर