: संगीतमय यात्रा मे केकेसी क्लब का आलीराजपुर का भगोरिया उत्सव - माधुरी सोनी मधुकुंज
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Tue, Mar 7, 2023
किसी भी देश की धरोहर वहाँ की संस्कृति होती है। हमारे भारत के हर प्रान्त की धरोहर लोक पर्व होते हैं।ऐसे ही अनोखा लोक पर्व पश्चिमी मध्यप्रदेश के आलीराजपुर व झाबुआ की लोकप्रियता को बढ़ाता भगोरिया है। भला माटी की महक से कौन नही जुड़ना चाहता।ऐसी माटी जहां क्रांति की अलख जगाई स्वतंत्रता के अनेक जन नायकों ने व चन्द्र शेखर आजाद ने।
इसी दर्शन व सौंदर्य को निहारने हमारे मालवा के इंदौर शहर के संस्कृति संगीत प्रेमी ग्रुप KKC के 40 सदस्यों की संगीत मय यात्रा ने भगोरिया उत्सव में धूम मचाने की सोची।
अलसुबह यात्रा करते हुए टीम सदस्य टांडा पहुंचे व आनन्दी भाई भवेल के लोकगीतों पर झूमे। आलीराजपुर के छकतला में पहुंचकर सर्व संस्कृति का दर्शन मस्त होकर झूमने पर आनन्दमय हो उठे।
आलीराजपुर साहित्यकार माधुरी सोनी मधुकुंज के सहयोगी मनीषा द्वारा लोकसंस्कृति की झलक दिखवाई गई । पुनः अगले वर्ष आने का अनुरोध व्यापक तौर पर KKC टीम प्रयास करेगी।
यह यात्रा कैलाशजी गुरबानी व नागदा के राधाकिशन कदम जी के नेतृत्व में जैन तीर्थ लक्ष्मणि जी में दालपानिये भोजन का लुत्फ उठाती हुई अपने गंतव्य की ओर यादों को दिल में सहेजे प्रस्थान हुई ।

यहां की विरासत लोक पर्व भगोरिया के प्राम्भिक चरणों मे मौसम भी मेहरबान हो जाता है।हरी भरी पृकृति ,ऊंचे नीचे टीले, ताड़ के वृक्ष,महकता महुआ, मादकता भरी ताड़ी,व गांव की भोली बालाओं का अनुपम सौंदर्य हर आगंतुक का मन मोह लेते हैं।
विरासत इस पर्व की तब ओर बढ़ जाएगी तब विश्व पटल के यूनेस्को द्वारा भगोरिया पर्व को वृहद लोक पर्व ,या भिलांचल लोकोत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त हो।
यूनेस्को टीम द्वारा आलीराजपुर की सांकृतिक धरोहर भीलपर्व के रूप में यहां की बोली,रहन सहन,परिधान,स्वादिष्ट भोजन,शिल्प कला,गीत,पारंपरिक रिवाज़, देसी वाद्य यंत्र,व कड़कनाथ मुर्गा भी है।जो कहीं अन्य जगह नहीं मिल सकते।
जब हर प्रदेश के उत्सव को मान्यता दी जा सकती है तो भगोरिया पर्व को भी अग्रणी रखना चाहिए।
इसी सार्थकता को आलीराजपुर की जनता भी स्वीकारती है।
बड़ी दूर देश विदेशों से ईस देसी सांकृतिक झलक को देखने पर्यटक भी आते हैं। प्रशासन शासन की ओर से भी सुरक्षा के उचित प्रबंध व दायित्व भी चाक चौबंद रहते हैं।
आईए सभी इस मुहिम का हिस्सा बन यूनेस्को टीम द्वारा हमारे पर्व की महत्ता पर हम सहमति देकर मोहर लगाएं।

माधुरी सोनी मधुकुंज
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